सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

अटल बिहारी वाजपेयी

अटल बिहारी वाजपेयी 
नमन अटल..

#अटल
उदात्त शांत सागर सा वो
    भावो की भरी गागर सा वो।

मुग्ध हुआ था विश्व पटल
       जब बोल उठा था वीर अटल
पर्वत सा साहस ऊँचा था
          सागर से गहराई ज्यादा।
हिंदी के मीठे स्वर फूटे
         थे  वीर अटल ने दिल लुटे



अटल स्वप्न नयनों में लेके,मधुर कविता गाता
देश-प्रेम का जज्बा दिल में,मुख उसका बतलाता ।

निडर ऐसा लापरवाह ,अंजाम से ना घबराता
पथ के पत्थर को मार के ठोकर,आगे वो बढ़ जाता ।

निज भाषा के शब्दों को , विश्व मंच पे था बिखराया
विश्व-पटल पर खड़ा अटल वो,मेघ के सम था गरजा ।

पोकरण या कारगिल हो ,शक्ति सिंह सी दिखलाता।
दुश्मन को  लाचार बनाकर,नाकों चने चने चबवाता।

राजनीति का चतुर खिलाडी,शब्दों के तीर सुनहले,
खुद उलझन में फंसता पर,परहित हर द्वार थे खोले।

कथनी करनी एक सामान, आँखों में बस हिंदुस्तान,
अटल वचन वाला वो सिपाही,अटल बिहारी है महान।

अटल-फैसला,अटल-ह्रदय से, लेना तब मज़बूरी थी,
गद्दारों को सबक सिखाने , की पूरी तैयारी थी।

तैयार खड़े थे सीमा पर,तोपों की गर्जन थी भारी थी,
सबक सिखाया दुश्मन को,पाक को दी सीख करारी थी।

#सुनीता बिश्नोलिया©
#जयपुर


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

जलाते चलो - - #द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

भावार्थ   जलाते चलो - -  #द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी का जन्म 1 दिसम्बर 1916 को आगरा जिला के रोहता गाँव में हुआ। उनकी मुख्य कृतियाँ - 'हम सब सुमन एक उपवन के' , 'वीर तुम बढ़े चलो'...  जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर कभी तो धरा का अँधेरा मिटेगा। भले शक्ति विज्ञान में है निहित वह कि जिससे अमावस बने पूर्णिमा-सी; मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा-सी। बिना स्नेह विद्युत-दिये जल रहे जो बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा॥1॥ जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी; तिमिर की सरित पार करने तुम्हीं ने बना दीप की नाव तैयार की थी। बहाते चलो नाव तुम वह निरंतर कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा॥2॥ युगों से तुम्हींने तिमिर की शिला पर दिये अनगिनत हैं निरंतर जलाये; समय साक्षी है कि जलते हुए दीप अनगिन तुम्हारे पवन ने बुझाये। मगर बुझ स्वयं ज्योति जो दे गये वे उसी से तिमिर को उजेला मिलेगा॥3॥ दिये और तूफान की यह कहानी चली आ रही और चलती रहेगी; जली जो प्रथम बार लौ दीप की स्वर्ण-सी जल रही और

नश्वर जीवन...नहीं मरूंगी मैं

नहीं मरूंगी मैं  दुनिया है दुनिया में अपनी  आज निशानी छोड़ रही हूँ  झूठ जगत में रिश्ते नाते  मगर निभाए सारे हैं  क्या पाया रिश्ते-नातों में  मत पूछो हम हारे हैं  रिश्तों के पतले धागे मैं  पकड़े हूँ, ना छोड़ रही हूँ  ।।  धरती पर जो  भी आया है एक दिन उसको जाना है,  सत्य जानती हूँ जीवन का छोड़ जगत को जाना है ।  इस नश्वर जीवन का मुख मैं  अमर बेल से जोड़ रही हूँ।।  नहीं मरेगी कभी कविता  जीवन गीत सुनाएगी,  याद रहूँगी किस्सों में  बातें दोहराई जाएंगी । कलम कहेगी किस्से मेरे  इससे रिश्ता जोड़ रही हूँ।।  सुनीता बिश्नोलिया ©®

लघु कथा लेखन

लघु कथा लेखन  लघु कथा लेखन  लघु अर्थात 'संक्षिप्त   लघु कथा साहित्य की प्रचलित और लोकप्रिय विधा है।  देखा जाए तो यह उपन्यास का ही लघु संस्करण है।   हालांकि 'लघु' का मतलब संक्षिप्त होता है किंतु संक्षिप्त' होने के बावजूद भी पाठक  पर इसका प्रभाव दीर्घकालीन  होना आवश्यक है अर्थात लघु कथा गागर में सागर भरने वाली अनुपम विधा है।   किसी उपन्यास के समान इसमें भी पात्र कथानक, द्वंद समायोजन तथा समाधान जैसे तत्व विद्यमान होते हैं।   लघुकथा कल्पना प्रधान कृति है परंतु इसके प्रेरणा जीवन  की वास्तविकता तथा आसपास की घटनाओं से ही मिल जाती है।      अर्थात हम कह सकते हैं कि लघु कथाएं सीमित शब्दों में बहुत कुछ कह देने की योग्यता रखती  हैं तथा पाठकों के अंतर्मन पर पहुंचकर अपना संदेश उन तक पहुंचाती है और यही लघुकथा का  मुख्य उद्देश्य है।   अतः लघुकथा का वास्तविक उद्देश्य तभी सार्थक है जबइसे  पढ़कर   पाठक प्रभावी तथा संतुष्ट हो जाए।   ***लघु कथा लेखन के दौरान ध्यान रखने योग्य जरूरी बातें ----- ** अच्छी लघुकथा लिखने के लिए लेखक को एक अच्छा पाठक होना भी जरूरी