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संदेश

सुप्रभात #सुप्रभात #goodmorning - दोहे

सुप्रभात  झूठा-अंजन डाल के,मत कर आँखें बंद।    सत्य साथ देगा सदा,झूठ रहे दिन चंद।1।    अहंकार का मत भरो,काजल अपनी आँख।     टूटेगा इक रोज ये, ज्यों पंछी की पाँख।2।   .काजल ज्यों काले करे,निर्मल-कोमल हाथ।      साथी को दागी करे, दुष्ट मनुज का साथ।2।     रंग मंच दुनिया सकल,अभिनय करना काम।     दाता नाच नचा रहा, बैठा डोरी थाम।3।      सुनीता बिश्नोलिया 

#सुबह. सूरज #सूरज सुप्रभात

#सुबह स्वर्ण रश्मियाँ छितराई,लो आई अलमस्त सुबह, चिड़ियाँ  ने भी पंख पसारे,लो आई मदमस्त सुबह। झाँक उठी पल्लव से कलियाँ,नवजीवन लेआई सुबह, भाग पड़ी तारों की सेना,नटखट इठलाती आई सुबह। लो गायें भी लगी रंभाने,गाती-मुस्काती आई सुबह, पशुधन दुहने ग्वाल चले,घर भरने फिर आई सुबह। सज-धज पनघट चली गुजरिया,अलबेली लो आई सुबह, साथ चली छनकाती पायलिया खेतों में मुस्काई सुबह। चलीं कुदालें और फावड़े,नव सृजन करने आई सुबह,  बज उठी तान मोहन की ,लो वीणा के स्वर लाई सुबह। #सुनीता बिश्नोलिया #जयपुर

सुप्रभात #सुप्रभात

सुप्रभात अंगड़ाई सूरज ने ली,       कर खोल रहा धीरे-धीरे। चली यामिनी वसन समेटे,      खग कलरव करते यमुना तीरे।। 

पर्यावरण - दोहे #पर्यावरण

पर्यावरण दिवस  पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाएं हरी-भरी धरती रहे,नीला हो आकाश, स्वच्छ बहे सरिता सभी,स्वच्छ सूर्य प्रकाश।। पेड़ों को मत काटिए,करें धरा श्रृंगार। माटी को ये बांधते,ये जीवन आधार।। वन के जीव बचाइये,रखते धरती शुद्ध। अपने ही अस्तित्व को, करते हमसे युद्ध।। शुद्ध हवा में साँस लें,कोई न काटे पेड़। आस-पास भी साफ़ हो, सभी बचाएँ पेड़।। धरती माता ने दिए,हमें अतुल भण्डार, स्वच्छ पर्यावरण रखें, मानें हम उपकार।। कानन-नग-नदियाँ सभी,धरती के श्रृंगार।  दोहन इनका कम करें,मानें सब उपहार।।  साफ-स्वच्छ गर नीर हो,नहीं करें गर व्यर्थ। कोख न सूखे मात की, जल से रहें समर्थ। धूल-धुआँ गुब्बार ही,दिखते चारों ओर। दूषित-पर्यावरण हुआ,चले न कोई जोर।। कान फाड़ते ढोल हैं,फूहड़ बजते गीत, हद से ज्यादा शोर है,खोये मधुरम गीत। हरी खुशहाली के,धरती भूली गीत। मैली सी वसुधा हुई,भूली सुर संगीत।। पर्यावरण स्वच्छ राखिये,ये जीवन आधार, खुद से करते प्यार हम,कीजे इससे प्या

सुप्रभात #suprbhat #goodmorning

सुप्रभात  ये बैरागी दिवस बावरा,समय की बहती धारा है जीता जो क़ीमत पहचाना,जो ना जाना हारा है  पल-पल,क्षण-क्षण बीत रहा,जो मोती से मंहगा है  आज दौड़ सूरज संग की तो,आगे वक्त तुम्हारा है।  सुनीता बिश्नोलिया

सुप्रभात #suprbhat #सुप्रभात #goodmorning

सुप्रभात 🙏🙏#नमस्कार दोस्तों #स्वस्थ रहें #मस्त रहें 🌹🌹🌹🌹🌻🌻🌻 सृष्टि की रचना से अब तक धरा पर  विपदा के सागर कितने ही आए।  विपदा के आगे मगर ना कभी भी  कदम उठ गए जो पिछले हटाए।  खड़े हो गए काल के जाके सम्मुख  हमें काल से फिर, टकराना होगा।। #सुनीता बिश्नोलिया #सुनीति #जीवनजय

#Corona कोरोनाकाल में हिम्मत प्रदान करती कविता - #हरिवंशरायबच्चन

नीड़ का निर्माण फिर-फिर, नेह का आह्णान फिर-फिर! वह उठी आंधी कि नभ में छा गया सहसा अंधेरा, धूलि धूसर बादलों ने भूमि को इस भांति घेरा, रात-सा दिन हो गया, फिर रात आ‌ई और काली, लग रहा था अब न होगा इस निशा का फिर सवेरा, रात के उत्पात-भय से भीत जन-जन, भीत कण-कण किंतु प्राची से उषा की मोहिनी मुस्कान फिर-फिर! नीड़ का निर्माण फिर-फिर, नेह का आह्णान फिर-फिर! चित्र आभार वह चले झोंके कि कांपे भीम कायावान भूधर, जड़ समेत उखड़-पुखड़कर गिर पड़े, टूटे विटप वर, हाय, तिनकों से विनिर्मित घोंसलो पर क्या न बीती, डगमगा‌ए जबकि कंकड़, ईंट, पत्थर के महल-घर; बोल आशा के विहंगम, किस जगह पर तू छिपा था, जो गगन पर चढ़ उठाता गर्व से निज तान फिर-फिर! नीड़ का निर्माण फिर-फिर, नेह का आह्णान फिर-फिर! क्रुद्ध नभ के वज्र दंतों में उषा है मुसकराती, घोर गर्जनमय गगन के कंठ में खग पंक्ति गाती; एक चिड़िया चोंच में तिनका लि‌ए जो जा रही है, वह सहज में ही पवन उंचास को नीचा दिखाती! नाश के दुख से कभी दबता नहीं निर्माण का सुख प्रलय की निस्तब्धता से सृष्टि का नव गान फिर-फिर! नीड़ का निर्माण फिर-फिर, नेह का आह्णान फिर-फिर! स