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वीना चौहान - साहित्य को समर्पित 💐💐जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं वीना दी 🎂🎂💐🎂💐🎂

जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं वीना दी 🎂🎂💐🎂💐🎂
कहती हैं सूरज की किरणें  
                  कर खुद पर विश्वास।    
     हारेगा सौ बार मनुज, 
                मत छोड़ जीत की आस।। 

   "मंजिलें नेक हों तो सपने भी साकार होते हैं, 
   अरे सच्ची लगन हो तो रास्ते आसां होते हैं।" 
      जी हाँ बिल्कुल ये सही कहा है किसी ने     
  क्योंकि कार्य करने की ललक और हिम्मत भी व्यक्ति जुटा लेता है पर उद्देश्य स्पष्ट ना होने के कारण व्यक्ति असफल भी हो सकता है। किंतु कार्य अगर लोक कल्याण का हो और इसी जन कल्याण को करने की तीव्र उत्कंठा आपके जीवन का उद्देश्य और महिला लेखिकाओं को लेखन के अवसर प्रदान कर उन्हें मंज़िल की ओर अग्रसर करना आपका लक्ष्य बन जाए तो वास्तव में आप एक सच्चे साहित्यकार हैं।
राजस्थान लेखिका संघ की पूर्व अध्यक्ष एवं नारी कभी ना हारी संस्था की संस्थापिका आदरणीय वीना चौहान दी आज किसी परिचय की मोहताज नहीं। भारत में ही नहीं वरन विदेशों में भी आप 'नारी कभी ना हारी' के माध्यम से महिलाओं को एक मंच पर लाने का प्रयास  कर रही हैं। 
एक साहित्यकार होने के पर भी वे किसी अन्य महिला साहित्यकार को अपनी प्रतियोगी नहीं वरन समान मानती हैं। इसीलिए तो वे बिना ईर्ष्या के अन्य महिला लेखिकाओं को लेखन हेतु प्रोत्साहित कर उन्हें प्रकाशनार्थ सहायता के मार्ग भी प्रशस्त करती हैं। 
    सच कहूँ तो मेरे प्रथम काव्य संग्रह की प्रेरणा मैंने वीना दी से ही प्राप्त की। उन्होंने ना केवल मेरे काव्य संग्रह की पांडुलिपि को पढ़ा वरन उसकी कुछ कविताओं को बहुत अच्छा या अच्छा एवं पाठ्यक्रम लायक बता कर पेंसिल लिखकर शाबाशी दी। वो पांडुलिपि  मैंने लिए वीना दी के आशीर्वाद स्वरुप अपने पास संभाल कर रखी हुई है। मुझे आपका आशीर्वाद सदा फलता हैं दी। मेरे कहानी संग्रह जोग लिखी को भी आपका आशीर्वाद मिला आगे भी आपके आशीर्वाद की आकांक्षी रहूँगी।  
     आज वीना दी के जन्मदिन के अवसर पर यही कहूँगी 🌼💐💐🎂🎂
        आपके नाम में ही वास है 
        सरस्वती का, 
        तभी तो बांट रही हैं ज्ञान 
        अनवरत । 
        जिनके जीवन की सरगम
        खो गई थी कहीं अंधकार में। 
         नहीं बचा था संगीत
        उनकी नजर में। 
       आपने पहचानकर हुनर 
        पहचान दिलवाई नई।                
        आपके हाथ से पाकर कलम 
        निराशा और अंधकार में डूबे  
        वो एकाकी मन और 
        निखरे  हैं बहुत जीवन। 
        
सुनीता बिश्नोलिया 


   
        
        
 
         
 
  
  




टिप्पणियाँ

  1. बहुत ही प्रभावशाली ढंग से वीना दीदी के जन्मदिन को अविस्मरणीय बना दिया। यह भी आपकी सफल साहित्यिक रुचि को इंगित करता है। आपको बहुत बहुत शुभकामनाएं और आशीष ।

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  2. बहुत बहुत धन्यवाद 💕💕💕💕💕🌼🌼💐💐💐💕💕💕🙏🙏🙏🙏🙏

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